AI की निगरानी में होगा ड्राइविंग टेस्ट, डूंगरपुर में डिजिटल ट्रैक शुरू
ड्राइविंग लाइसेंस की परीक्षा अब CCTV कैमरों, फेस रिकग्निशन और RFID तकनीक के माध्यम से होगी। टेस्ट में अभ्यर्थी की प्रत्येक गलती रिकॉर्ड होगी और परिणाम अंकों के आधार पर तय किया जाएगा।

डूंगरपुर में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए जिला परिवहन कार्यालय में डिजिटल ड्राइविंग ट्रैक शुरू किया गया है। नई व्यवस्था में अभ्यर्थी के वाहन चलाने के तरीके का मूल्यांकन अधिकारियों के बजाय कैमरों और डिजिटल सिस्टम से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर किया जाएगा।
ड्राइविंग ट्रैक पर 25 हाई-रिजॉल्यूशन CCTV कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे टेस्ट शुरू होने से लेकर उसके पूरा होने तक वाहन की प्रत्येक गतिविधि रिकॉर्ड करते हैं। अभ्यर्थी ने ट्रैक की लाइन छुई, निर्धारित स्थान पर वाहन रोका या नहीं और टेस्ट तय समय में पूरा किया या नहीं, ऐसी सभी गतिविधियां सिस्टम में दर्ज होंगी।
इस प्रक्रिया में पहचान सुनिश्चित करने के लिए फेस रिकग्निशन तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। टेस्ट के अलग-अलग चरणों में अभ्यर्थी का चेहरा स्कैन किया जाएगा। इससे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अभ्यर्थी के स्थान पर ड्राइविंग टेस्ट देने जैसी गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा।
टेस्ट शुरू करने से पहले संबंधित बाइक या कार पर RFID डिवाइस लगाया जाएगा। डिवाइस सक्रिय होने के बाद ट्रैक का प्रवेश द्वार खुलेगा और अभ्यर्थी की ड्राइविंग रिकॉर्ड होनी शुरू हो जाएगी। परीक्षा पूरी होते ही डिवाइस स्वतः निष्क्रिय हो जाएगा और रिकॉर्ड के आधार पर परिणाम तैयार होगा।
डिजिटल ड्राइविंग टेस्ट में पास होने के लिए अभ्यर्थी को 100 में से कम से कम 60 अंक प्राप्त करने होंगे। जिला परिवहन कार्यालय, डूंगरपुर से संबंधित प्रकाशित जानकारी
डिजिटल ड्राइविंग टेस्ट कुल 100 अंकों का रखा गया है। लाइसेंस के लिए पात्र होने हेतु कम से कम 60 अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा। कार चालक को निर्धारित समय के भीतर पार्किंग, आठ के आकार वाले ट्रैक पर ड्राइविंग, जंक्शन पर रुकने और चढ़ाई वाले हिस्से को पूरा करने जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
कार टेस्ट में पार्किंग के लिए दो मिनट और आठ के आकार वाले ट्रैक को पूरा करने के लिए 90 सेकंड का समय निर्धारित है। चालक को जंक्शन पर 10 सेकंड रुकना होगा, जबकि चढ़ाई वाले ट्रैक को दो मिनट में पूरा करना होगा। वाहन को चढ़ाई पर नियंत्रित स्थिति में रखने और फेस वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी।
बाइक के ड्राइविंग टेस्ट में ट्रैक की निर्धारित लाइन छूने या पैर जमीन पर रखने जैसी गलती परिणाम को प्रभावित कर सकती है। इस डिजिटल प्रणाली के कारण टेस्ट का प्रत्येक चरण रिकॉर्ड में रहेगा और मानवीय हस्तक्षेप की संभावना कम होगी।
यह व्यवस्था 23 जून से संचालित की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन करीब 30 बाइक और 20 कार चालकों के टेस्ट हो रहे हैं। वर्तमान में बाइक चालकों की सफलता दर लगभग 90 प्रतिशत और कार चालकों की सफलता दर लगभग 60 प्रतिशत बताई गई है।
सूचना स्रोत: दैनिक भास्कर, डूंगरपुर संस्करण, 20 जुलाई 2026


