वागड़ के 6155 सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी सीखेंगे जल, जंगल और जमीन का संरक्षण
शिक्षा समाचार बांसवाड़ा-डूंगरपुर

वागड़ के 6155 सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी सीखेंगे जल, जंगल और जमीन का संरक्षण

बांसवाड़ा और डूंगरपुर के सरकारी विद्यालयों में इको क्लब के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां कराई जाएंगी। इसके लिए दोनों जिलों को कुल 4.54 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

बांसवाड़ा और डूंगरपुर के सरकारी स्कूलों में पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा लेते विद्यार्थी

वागड़ क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों को अब पर्यावरण संरक्षण की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। बांसवाड़ा और डूंगरपुर के कुल 6155 विद्यालयों में इको क्लब के माध्यम से जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता के संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

इस कार्यक्रम के लिए दोनों जिलों को कुल 4.54 करोड़ रुपये का बजट मिला है। इसमें बांसवाड़ा जिले के 3372 सरकारी विद्यालयों के लिए 2.46 करोड़ रुपये और डूंगरपुर जिले के 2783 विद्यालयों के लिए 2.08 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

यह पहल केंद्र सरकार के मिशन लाइफ कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित की जाएगी। राज्य के 69,140 सरकारी विद्यालयों में इको क्लब फॉर मिशन लाइफ कार्यक्रम चलाने के लिए कुल 62.75 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है।

बांसवाड़ा के 3372 और डूंगरपुर के 2783 सरकारी विद्यालयों में इको क्लब की पर्यावरणीय गतिविधियों के लिए कुल 4.54 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। मिशन लाइफ से संबंधित प्रकाशित जानकारी

विद्यालयों में पौधारोपण करने के साथ लगाए गए पौधों की देखभाल और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान, वर्षा जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त विद्यालय, किचन गार्डन और औषधीय वाटिका जैसी गतिविधियां भी आयोजित होंगी।

विद्यार्थियों को गीले और सूखे कचरे को अलग करने, जैविक कचरे से कम्पोस्ट बनाने तथा ऊर्जा और पानी की बचत करने के व्यावहारिक तरीके भी सिखाए जाएंगे। जैव विविधता के संरक्षण को लेकर विद्यार्थियों की समझ विकसित करने के लिए स्थानीय पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी गतिविधियां कराई जाएंगी।

इको क्लब के माध्यम से पोस्टर, निबंध, चित्रकला और क्विज प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक पर्यावरणीय चुनौतियों और स्थानीय परंपराओं के बीच संबंध समझाना है।

प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा और आदिवासी संस्कृति के लिए पहचाने जाने वाले वागड़ क्षेत्र में यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपने आसपास के पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने में सहायता करेगा। विद्यालय स्तर पर होने वाली गतिविधियों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, स्वच्छता और संसाधनों के संरक्षण जैसे विषयों को व्यवहार से जोड़कर समझाया जाएगा।

सूचना स्रोत: दैनिक भास्कर, डूंगरपुर संस्करण, 21 जुलाई 2026

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