Sawan Begins in Vagad: देवसोमनाथ मंदिर, जहां रुद्राक्ष और स्फटिक शिवलिंग साथ हैं
Devsomnath Mandir Dungarpur: वागड़ अंचल में सावन की शुरुआत शुक्रवार से हो रही है और इसी के साथ डूंगरपुर जिले का प्रसिद्ध देवसोमनाथ मंदिर एक बार फिर श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार होगा। सोम नदी के किनारे स्थित यह मंदिर एक हजार वर्ष पुराना है और इसे जिले का सबसे रहस्यमयी और आध्यात्मिक स्थल माना जाता है। (Sawan Begins in Vagad)

इस मंदिर की खास बात है कि यहां दो शिवलिंग हैं – एक रुद्राक्ष के आकार वाला मुख्य शिवलिंग और दूसरा स्फटिक शिवलिंग, जो मणि की तरह चमकता है और खुद-ब-खुद हर साल आकार में बड़ा होता जा रहा है। इसे स्वयंभू शिवलिंग माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि रावण भी स्फटिक शिवलिंग की पूजा किया करता था।
देवसोमनाथ मंदिर की विशेषताएं:
- रुद्राक्ष और स्फटिक दोनों शिवलिंग एक साथ
- स्फटिक शिवलिंग में तिलक का निशान दिखाई देता है
- दोनों शिवलिंग हर साल धीरे-धीरे आकार में बढ़ रहे हैं
- सोम नदी के किनारे स्थित, प्राचीन स्थापत्य से युक्त
- सावन के महीने और शिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु दर्शन को आते हैं
सावन में विशेष आयोजन:
हर सोमवार, खासकर सावन मास में यहां भव्य पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और भजन संध्याओं का आयोजन होता है। मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी जाती हैं और पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल होता है।
FAQs:
Q1. देवसोमनाथ मंदिर कहाँ स्थित है?
Ans: यह मंदिर डूंगरपुर जिले के देव गांव में, सोम नदी के किनारे स्थित है।
Q2. What is special about Devsomnath Mandir?
Ans: It is the only temple in Rajasthan where both Rudraksha-shaped and Sphatik Shivlings are placed together.
Q3. क्या स्फटिक शिवलिंग का आकार बढ़ता है?
Ans: हाँ, स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्वयंभू शिवलिंग है जो प्रतिवर्ष थोड़ा-थोड़ा बड़ा होता है।
Q4. When is the best time to visit Devsomnath Mandir?
Ans: During Sawan (July-August), Mondays, and Mahashivratri for spiritual ambiance and grand festivities.