Bhedmata Mandir Dungarpur: वागड़ का चमत्कारिक मंदिर और इसकी मान्यताएं
राजस्थान का आदिवासी अंचल वागड़ अपनी परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और चमत्कारिक कहानियों के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं में से एक है भेड़माता मंदिर (Bhedmata Mandir Dungarpur), जिसकी कहानियां पीढ़ी-दर-पीढ़ी श्रद्धालुओं के बीच विश्वास का आधार रही हैं।

भेड़माता मंदिर का इतिहास और मान्यता
डूंगरपुर शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर, सागवाड़ा रोड पर डोजा पंचायत से गुजरती मोरन नदी की तलहटी में यह मंदिर स्थित है।
मान्यता है कि हजारों साल पहले यहां बेटों की बलि दी जाती थी। बाद में यह परंपरा बदली और बलि दामाद की दी जाने लगी, जिसे बेटे के समान माना जाता था। सबसे चमत्कारिक बात यह मानी जाती है कि जिसकी बलि दी जाती थी, वह माता के आशीर्वाद से फिर से जीवित हो जाता था। समय के साथ परंपराएं बदल गईं और आज यहां केवल जानवरों की बलि दी जाती है।
भेड़माता – संकटमोचन और कुलदेवी
भेड़माता को संकट के समय रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि यहां आकर जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से अपनी मनोकामना करता है, माता उसकी झोली जरूर भरती हैं।
यह मंदिर आदिवासी समुदाय के रोत गोत्र की कुलदेवी का धाम भी है। इसलिए यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
भेड़माता का वार्षिक मेला
हर साल मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की बीज पर यहां 3 दिनों का विशाल मेला आयोजित होता है।
- इसमें डूंगरपुर, बांसवाड़ा, राजस्थान के अन्य जिलों के अलावा गुजरात और मध्यप्रदेश से भी श्रद्धालु आते हैं।
- मेले में पारंपरिक ढोल, नृत्य और आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।
मंदिर तक कैसे पहुंचे?
- डूंगरपुर शहर से दूरी: लगभग 20 किलोमीटर
- रास्ता: सागवाड़ा रोड → डोजा पंचायत → मोरन नदी तलहटी
- यहां तक पहुंचने के लिए प्राइवेट वाहन या टैक्सी सबसे उपयुक्त साधन है।

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