मांडविया हनुमान जी मेला – डूंगरपुर की आस्था और संस्कृति की अनोखी पहचान
राजस्थान के दक्षिणी छोर पर बसे डूंगरपुर जिले में मांडविया हनुमान जी मंदिर श्रद्धा, भक्ति और संस्कृति का केंद्र है। (Mandaviya Hanuman Ji Mela Dungarpur)

हर साल देव दिवाली के अवसर पर यहाँ तीन दिन का विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें लगभग डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि वागड़ क्षेत्र की जीवंत परंपरा को भी दर्शाता है।
मंदिर का स्थान और इतिहास
मांडविया हनुमान जी मंदिर हड़मतिया गाँव में स्थित है, जो डूंगरपुर मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर है।
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसका संचालन पूरी तरह से आदिवासी समाज के लोगों द्वारा किया जाता है।
यह परंपरा और सामुदायिक एकता का जीवंत उदाहरण है, जहाँ हर जाति और वर्ग के लोग एक साथ इस मेले का हिस्सा बनते हैं।
मेले की रौनक और आकर्षण
जैसे ही आप मेले में पहुँचते हैं, चारों तरफ़ से रंग-बिरंगे झूले, दुकानों की रोशनी, लोक गीतों की मधुर ध्वनियाँ और धूप-फूलों की सुगंध आपको एक अद्भुत माहौल में ले जाती हैं।
यहाँ राजस्थान और गुजरात के कई इलाकों से श्रद्धालु भगवान मांडविया हनुमान जी के दर्शन के लिए आते हैं।
हर गाँव से लोग अपने समूह के साथ नाचते-गाते हुए मेले में पहुँचते हैं — यही वागड़ की असली पहचान है।
क्या मिलता है मेले में:
मांडविया हनुमान जी मेला सिर्फ़ दर्शन या मस्ती का नहीं, बल्कि एक बड़ा स्थानीय बाजार भी है।
यहाँ आपको मिलेगा:
- पारंपरिक मिठाइयाँ
- लोक झूले और खिलौने
- घर के बर्तन और सजावटी सामान
- मसाले और कृषि उपकरण
- टैटू (मेले की खास पहचान)
वागड़ की संस्कृति की झलक
यह मेला वागड़ की असली आत्मा को दिखाता है —
श्रद्धा, एकता, संगीत और परंपरा।
यहाँ हर मुस्कान में भक्ति है और हर कदम में उत्सव।
यह सिर्फ़ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि डूंगरपुर की संस्कृति का जश्न है।
कैसे पहुँचे मांडविया हनुमान जी मंदिर
- स्थान: हड़मतिया गाँव, डूंगरपुर (राजस्थान)
- दूरी: डूंगरपुर से लगभग 25 किमी
- निकटतम रेलवे स्टेशन: डूंगरपुर रेलवे स्टेशन
- निकटतम शहर: सागवाड़ा (30 किमी) और बांसवाड़ा (60 किमी)
- समय: हर साल देव दिवाली पर तीन दिन का मेला
